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डेस्डीमोना मरती नहीं

और वह चली गयी, क्या मैंने उसे रोकने की कोशिश की? क्या मैं उसे रोक सकती थी? शायद नहीं, पर वह थी कौन? एक चरित्र ही तो थी! जो किताब से निकल कर मेरे जीवन को एकदम तहसनहस कर गयी थी। वह ओस की पहली बूँद के जैसी निच्छल थी, पति के प्रेम का शिकार …

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गांधारी

शाम हो चुकी थी। एक महीने के अन्दर चुनाव होने वाले हैं दिल्ली में। और सडकों पर कोई हलचल नहीं, जैसे कि कुछ हो ही नहीं! इस बार नीरस से चुनाव लग रहे थे। न ही सड़क पर कुछ हलचल थी और न ही बाहर कुछ शोर। पहले तो ऐसा नहीं होता था, चुनावों की …

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