प्रथम विश्व युद्ध के दौरान महिलाओं की लिखी हुई कविताओं के हिन्दी अनुवाद

यह कविताएँ प्रथम विश्व युद्ध के दौरान महिलाओं की लिखी हुई कविताएँ हैं.

मेरी गैब्रेली कोलिन्स अपनी कविता वीमेन एट म्युटिशन मेकिंग, में स्त्रियों के इसी दुःख को व्यक्त करती हुई लिखती हैं:

Mary Gabrielle Collins(Ella) was born on 31 August 1874 in Penderyn (near Aberdare), Wales. She lived in the family homes, Duffryn House and Clearwell Court, and was listed with her mother at 67, Wiltshire Road, Brixton, in 1901

women at Munition Making  
Their hands should minister unto the flame of life, 
   Their fingers guide 
   The rosy teat, swelling with milk, 
   To the eager mouth of the suckling babe 
   Or smooth with tenderness, 
   Softly and soothingly, 
   The heated brow of the ailing child. 
   Or stray among the curls 
   Of the boy or girl, thrilling to mother love. 
   But now, 
   Their hands, their fingers 
   Are coarsened in munition factories. 
   Their thoughts, which should fly 
   Like bees among the sweetest mind flowers 
   Gaining nourishment for the thoughts to be, 
   Are bruised against the law, 
    ‘Kill, kill’. 
   They must take part in defacing and destroying the natural body 
   Which, certainly during this dispensation 
   Is the shrine of the spirit. 
    O God! 
   Throughout the ages we have seen,    Again and again 
   Men by Thee created 
   Cancelling each other. 
   And we have marvelled at the seeming annihilation 
   Of Thy work. 
   But this goes further, 
   Taints the fountain head, 
   Mounts like a poison to the Creator’s very heart. 
    O God! 
   Must It anew be sacrificed on earth?.
बारूद घर में स्त्रियाँ
  जिन्हें अपने हाथों में समेटना था
जीवन के सारे उल्लासों का आकाश,
जिनकी उँगलियों को अभी गोद में मचलते
शिशुओं के भूखे मुंह में देनी थी वात्सल्य की धार,
या बीमार शिशु के माथे पर धरना था
फाहे सा कोमल स्पर्श,
या उसके घुंघराले बालों के साथ खेलना था,
बेटा हो या बेटी,
उसे अपने माँ के प्रेम में होना था रोमांचित!
परंतु अब?
अब उनके हाथ, उनकी उंगलियाँ,
सनी हुई हैं बारूदों के कारखाने में,
उनके विचार जिन्हें भरनी थी मुक्त उड़ान,
जैसे मंडराते हैं भँवरे खूबसूरत फूलों पर,
जिन्हें चाहिए थी खुराक अपने नवजात विचारों के लिए,
वे घिरी हैं अब जीवन के खिलाफ,
“मारो, मारो” उन्हें अब लेना है भाग देह को विकृत करने और नष्ट की अनिवार्य प्रक्रिया में,
जो निश्चित ही उभरा है इस विधान के दौरान,
सबसे पवित्र कार्य!
हे प्रभु!
समय के साथ बार बार हमने देखा है,
तुम्हारी ही संतान एक दूसरे का करती है विनाश
और हम इस विध्वंस के साक्षी होकर हैं हतप्रभ!
पर अब यह निरंकुश हो रहा,
यह कर रहा परमात्मा को मैला,
चला रहा प्रभु के दिल पर विष बुझा तीर,
हे प्रभु!
क्या इसे नए सिरे से इस धरती से तजना न होगा?
Winifred M. Letts
THE DESERTER
There was a man,– don’t mind his name,
Whom Fear had dogged by night and day.
He could not face the German guns
And so he turned and ran away.
Just that– he turned and ran away,
But who can judge him, you or I?
God makes a man of flesh and blood
Who yearns to live and not to die.
And this man when he feared to die
Was scared as any frightened child,
His knees were shaking under him,
His breath came fast, his eyes were wild.
I’ve seen a hare with eyes as wild,
With throbbing heart and sobbing breath.
But oh! it shames one’s soul to see
A man in abject fear of death.
But fear had gripped him, so had death;
His number had gone up that day,
They might not heed his frightened eyes,
They shot him when the dawn was grey.
Blindfolded, when the dawn was grey,
He stood there in a place apart,
The shots rang out and down he fell,
An English bullet in his heart.
An English bullet in his heart!
But here’s the irony of life,–
His mother thinks he fought and fell
A hero, foremost in the strife.
So she goes proudly; to the strife
Her best, her hero son she gave.
O well for her she does not know
He lies in a deserter’s grave.
    भगोड़ा
एक इंसान था, मत पूछो कि उसका क्या नाम था,
जिसे उसका भय हर दिन रात सताता था,
वह था जो जर्मन बंदूकों के साए से भी डर जाता था,
और इसलिए वह मुड़ा और भाग गया,
बस वह मुड़ा और भाग गया!
मगर उसका फैसला कौन करेगा, मैं या आप?
भगवान ने उसे भी तो हाड़ मांस का ही बनाया था,
जिसने चाहा था जिंदा रहना और मरना नहीं चाहा था
और वह इंसान जब उसे मरने से डर लगता था,
तब वह एक छोटे बच्चे की तरह डरता था,
उसके घुटने कांपते रहते थे लगातार,
आँखें होती थी चौड़ी, और साँसों की होती थी तेज रफ़्तार,
धौंकनी तेज चलने लगती थी और साँसें उखड़ने लगती थीं.
मगर रुको! किसी को इस तरह डर के साए में देखना,
अपराध बहुत बड़ा है, शर्मनाक है!
मगर डर ने जैसे उसे जकड़ा था वैसे ही मृत्यु ने भी;
उस रोज़ वह आ ही गया सैनिकों की गोलियों के दरमियान,
जिन्होनें उसकी भयभीत आँखों का भी न रखा ध्यान,
उन्होंने उसे मारा जब कहीं सूरज धरने वाला था पाँव,
हाथ बंधे थे, जब कहीं सूरज धरने वाला था पाँव,
वह दूर कहीं एक जगह खड़ा हुआ था,
गोली के सटीक निशाने से वह निष्प्राण नीचे गिर रहा था,
दिल में धंसी,एक अंग्रेजी गोली
दिल में धंसी,एक अंग्रेजी गोली !
मगर विडंबना जीवन की उसके एक और भी थी,
उसकी माँ को लगा यह मृत्यु उसकी बहादुरी की वजह थी!
एक नायक, संघर्ष में जिसने किया होगा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन,,
और वह गयी गर्व से; युद्ध में करने उसके अंतिम दर्शन,
अपने बेटे का देखने देश के प्रति वीर समर्पण,
पर सही ही है उस बेचारी को नहीं पता है,
कि वह तो कहीं भगोड़ों की कब्र में सो रहा है
CASUALTY
John Delaney of the Rifles has been shot.
A man we never knew,
Does it cloud the day for you
That he lies among the dead
Moving, hearing, heeding not?
No history will hold his humble name.
No sculptured stone will tell
The traveller where he fell;
That he lies among tfle dead
Is the measure of his fame.
When our troops return victorious shall we care
That deaf to all the cheers,
Lacking tribute of our tears,
He is lying with the dead
Stark and silent, God knows where?
John Delaney of the Rifles– who was he?
A name seen on a list
All unknown and all unmissed.
What to us that he is dead?–
मृत्यु
राइफल्स का जॉन डेलेंसी बना गोली का शिकार,
एक व्यक्ति जो था हमसे अपरिचित अनजान,
क्या तुम्हारे दिल में अंधेरा हुआ है?
कि वह इन मृत देह में कहीं खो गया है?
न हिल रहा, न सुन रहा और न चौकस रहा है?
इतिहास में उसका नामलेवा कोई न हो पाएगा,
मुसाफिर को न कोई भी पत्थर यह बता पाएगा,
कि यही वह जगह है जहां से वह कभी न उठा,
यह कि इन मृत देहों में वह भी है खोया हुआ,
और ऐसे ही मापेंगे क्या उसके यश को?
जब लौटेंगे हमारे विजयी सैनिक,
तो क्या हमें होगी परवाह,
कि खुशी की हर धुन को बिना सुने,
हमारे अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के अभाव में,
वह लेटा है मृत देहों के संग,
शांत और निरापद, प्रभु जाने कहाँ?
राइफल्स का जॉन डेलेंसी- कौन था वह?
सूची पर उभरा एक नाम,
सभी अज्ञात और सभी प्राप्त,
हमारे लिए क्या कुछ फर्क पड़ रहा है
कि वह मृत देहों के बीच मृत पड़ा है!

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